शारीरिक शोषण और देह व्यापार मानव तस्करी का अमानवीय व्यापार…!

“ न सपनों की ये दुनिया है, न ख़्वाबों का आसमानअंधे हैं

तमाम रास्ते यहां, अंधा है, ये जहांरूह को बेचकर हर बात होती है

यहां इशारों में, जिस्मों को ख़रीदा जाता है मात्र चंद रुपयों में.

किससे शिकवा करें, किससे करें गिला, कुछ अजीब-से हैं

इन गलियों के निशानरिश्ते ढूंढ़ने पड़ते हैं

जहां इश्तेहारों में, इंसान भी बिकते हैं यहां बाज़ारों में

ह्यूमन ट्रैफिकिंग : यानी मानव तस्कारी कहने को तो ग़ैरक़ानूनी है, लेकिन फिर भी यह हमारे समाज की गंभीर समस्या बनी हुई है. शारीरिक शोषण और देह व्यापार से लेकर बंधुआ मज़दूरी तक के लिए ह्यूमन ट्रैफिकिंग की जाती है.

–  ड्रग्स और हथियारों के बाद ह्यूमन ट्रैफिकिंग दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑर्गनाइज़्ड क्राइम है.

– 80% मानव तस्करी जिस्मफ़रोशी के लिए होती है.

–  एशिया की अगर बात करें, तो भारत इस तरह के अपराध का गढ़ माना जाता है.

–  ऐसे में हमारे लिए यह सोचने का विषय है कि किस तरह से हमें इस समस्या से निपटना है.

–  मानव तस्करी में अधिकांश बच्चे बेहद ग़रीब इलाकों के होते हैं.

–  मानव तस्करी में सबसे ज़्यादा बच्चियां भारत के पूर्वी इलाकों के अंदरूनी गांवों से आती हैं.

– अत्यधिक ग़रीबी, शिक्षा की कमी और सरकारी नीतियों का ठीक से लागू न होना ही बच्चियों को मानव तस्करी का शिकार बनने की सबसे बड़ी वजह बनता है.

– इस कड़ी में लोकल एजेंट्स सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं.

– ये एजेंट गांवों के बेहद ग़रीब परिवारों की कम उम्र की बच्चियों पर नज़र रखकर उनके परिवार को शहर में अच्छी नौकरी के नाम पर झांसा देते हैं.

– ये एजेंट इन बच्चियों को घरेलू नौकर उपलब्ध करानेवाली संस्थाओं को बेच देते हैं. आगे चलकर ये संस्थाएं और अधिक दामों में इन बच्चियों को घरों में नौकर के रूप में बेचकर मुनाफ़ा कमाती हैं.

– ग़रीब परिवार व गांव-कस्बों की लड़कियों व उनके परिवारों को बहला-फुसलाकर, बड़े सपने दिखाकर या शहर में अच्छी नौकरी का झांसा देकर बड़े दामों में बेच दिया जाता है या घरेलू नौकर बना दिया जाता है, जहां उनका अन्य तरह से और भी शोषण किया जाता है.

– साथ ही वहां न स़िर्फ उनके साथ मार-पीट की जाती है, बल्कि अन्य तरह के शारीरिक व मानसिक शोषण का भी वे शिकार होती हैं.

– न स़िर्फ घरेलू नौकर, बल्कि जिस्मफ़रोशी के जाल में भी ये बच्चियां फंस जाती हैं और हर स्तर व हर तरह से इनका शोषण होने का क्रम जारी रहता है.

एक नज़र आंकड़ों पर…

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के नए आंकड़ों के अनुसार ट्रैफिकिंग में यह दूसरा सबसे बड़ा अपराध है, जो पिछले 10 सालों में 14 गुणा बढ़ा है और वर्ष 2014 में 65% तक बढ़ा है.

– लड़कियां और महिलाएं ट्रैफिकिंग के निशाने पर रहती हैं, जो पिछले दस सालों में देशभर के ह्यूमन ट्रैफिकिंग केसेस का 76% है.

–  ह्यूमन ट्रैफिकिंग के अंतर्गत ही अन्य जो केसेस रजिस्टर होते हैं, उनमें वेश्यावृत्ति के लिए लड़कियों को बेचना, विदेशों से लड़कियों को ख़रीदना और वेश्यावृत्ति के लिए लड़कियों की ख़रीद-फरोख़्त आदि आते हैं.

–  यदि भारत की बात की जाए, तो ह्यूमन ट्रैफिकिंग का जाल लगभग हर राज्य में फैला हुआ है

– ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मुख्य स्रोत जहां लड़कियों को रेड लाइट एरिया के लिए ख़रीदा व बेचा जाता है.

करता है.

–  इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि यह बहुत अधिक मुना़फे का धंधा है, ज़्यादा-से-ज़्यादा पैसा कमाने का लालच इस तरह के अपराधों के फलने-फूलने की बड़ी वजह बन रहा है.

क़ानूनी प्रावधान

इम्मॉरल ट्रैफिकिंग प्रिवेंशन एक्ट (आईटीपीए) के अनुसार अगर व्यापार के इरादे से ह्यूमन ट्रैफिकिंग होती है, तो 7 साल से लेकर उम्र कैद तक की सज़ा हो सकती है. इसी तरह से बंधुआ मंज़दूरी से लेकर चाइल्ड लेबर तक के लिए विभिन्न क़ानून व सज़ा का प्रावधान है. लेकिन सबसे बड़ी समस्या क़ानून को क्रियान्वित करने की ही है.

प्रशासनिक प्रयास

–  केंद्र सरकार विभिन्न राज्यों को फंड्स प्रदान करती है और वेब पोर्टल भी लॉन्च किया गया है, ताकि मानव तस्करी का यह अमानवीय व्यापार रुक सके या कम हो सके.

–  इसके अलावा महिला व बाल विकास विभाग ने भी पीड़ितों के बचाव व पुनर्वसन के लिए अपने प्रयास तेज़ किए हैं.

B.S.V.K.S की भूमिका : यह संस्था महिलाओं की विभिन्न समस्याओं में से बच्चों, लड़कियां और महिलाओं की ट्रैफिकिंग पर भी काम करती है. संस्था ऐसे पीड़ितों को खोजकर उन्हें इस समस्या से निजात दिलवाकर उन्हें हर संभव मदद प्रदान करती/करवाती है हम लड़कियों को या बच्चों को इस कड़ी से बाहर निकाल लें, फिर भी सही तरी़के से पुनर्वसन के अभाव में वे फिर से इस कड़ी का हिस्सा बन जाते हैं. हमारी संस्था इस तरह के लोगों के लिए उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने की दिशा में भी काम करती है. बच्चों को भी मानसिक रूप से क्लीन करवाया जाता है, उनकी काउंसलिंग  भी करवाई जाती है, ताकि उनके मन से वो ख़ौफ़ व बुरी यादें निकल सकें. जिस्में काफ़ी सफलता भी मिली है.

यह संस्था पीड़ितों को शिक्षा, आवास, चिकित्सा व रोजगार की भी व्यवस्था उपलब्ध करवाती है तथा संस्था उन बच्चों की भी सहायता करती है जो इस शर्मनाक घटना के शिकार होते हैं  संस्था जिस्मफ़रोशी में लिप्त महिलाओं के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी काम करती है, ताकि वे एक बेहतर जीवन जी सकें.

“आप सभी बंधुओं से अनुरोध है आप अपने आस-पास इस तरह  के बच्चों, महिलाओं व लड़कियों की जानकारी हमें अवश्य दें, तथा ऐसे पीड़ितों की मदद करने तथा संस्था के इस मिशन को सफल बनाने में अपना सहयोग अवश्य प्रदान करें |”

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