गांव हो या शहर पढ़ाई लिखाई के बावजूद कई महिलाएं प्रोफेशनल कोर्स के अभाव में जिंदगी भर घर के कामकाज तक ही सीमित रह जाती हैं जिससे उन्हें तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है इन्हीं मुसीबतों की एक कड़ी रोजगार से जुड़ी है जिसका प्रमुख कारण रोजगार के अवसरों पर पुरुषों का वर्चस्व भी रहा है
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगार के भरपूर अवसर हैं इनमें से एक है सिलाई करना सिलाई एक कला है हर महिला में यह कला थोड़ी बहुत पाई जाती है सिलाई एक ऐसी कला है जिसे महिलाएं अपने घर पर रहकर भी कर सकती हैं इससे अच्छी आमदनी के साथ-साथ घर परिवार की देखभाल एवं अपना एवं अपने परिवार का भरण पोषण भी कर सकती हैं यही कारण है जिससे कि महिलाओं में सिलाई सीखने की लग्न सबसे अधिक देखी गई है
भारत में रोजगार के क्षेत्र में महिलाएं सार्वजनिक सिलाई के काम से जुड़ी हुई है इस कार्य में महिलाओं की कई एनजीओ एवं सामाजिक संस्थाएं मदद कर रही हैं जिन महिलाओं को सिलाई नहीं आती है उनको संस्थाओं द्वारा सिलाई सिखाई जाती है सिलाई सिखा कर रोजगार दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं इसी मुहिम के तहत भारतीय समृद्धि विकास कल्याण संगठन ट्रस्ट बिहार भी महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए बिहार राज्य के कई जिलों में ग्राम सभा पंचायत स्तर पर सिलाई कढ़ाई एवं फैशन डिजाइनिंग सेंटर खोलने का कार्य करती आ रही है संस्था द्वारा छह महा कोर्स प्रारंभ किया गया है यह कोर्स महिलाओं की सिलाई की कला को निखारने के साथ साथ ही उन्हें प्रोफेशनल सर्टिफिकेट भी उपलब्ध कराने का कार्य करेगा जिससे कि वे भविष्य में इस कला के जरिए रोजगार हासिल कर सकेंगे साथ ही स्वाभिमान और आत्मनिर्भर का जीवन भी जी सकेंगे इसके अतिरिक्त भारतीय समृद्धि विकास कल्याण संगठन ट्रस्ट बिहार अपनी संस्था द्वारा कोर्स करने वाली छात्राओं को कोर्स के पूरा होने पर रोजगार का अवसर भी देने का कार्य करेगी ताकि छात्राएं या महिलाएं जल्द से जल्द अपना काम शुरू कर सकें और अपने पैरों पर आत्मनिर्भर हो सकें ।