महिला संरक्षण वाहिनी – भारतीय समृद्धि विकास कल्याण संगठन/ट्रस्ट
महिला संरक्षण वाहिनी –

        भारतीय समृद्धि विकास कल्याण संगठन/ट्रस्ट द्वारा संचालित महिला संरक्षण वाहिनी के तहत प्रदेश के प्रत्येक जिले  में महिलाओं को कानूनी सुरक्षा , सामाजिक संरक्षण तथा सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए भारतीय समृद्धि विकास कल्याण संगठन/ट्रस्ट  ने भारत देश के राज्यों  के सभी  जिलों में महिला संरक्षण वाहिनी का गठन किया है । महिला संरक्षण वाहिनी  के तहत महिलाओं के अधिकारों तथा उनके कानूनी अधिकारों के द्वारा उन्हें सुरक्षा एवं संरक्षण प्रदान किया जाता है । महिलाओं के साथ हो रही घरेलू हिंसा, विवाह, संपत्ति, उत्तराधिकार , दहेज आदि से “समान नागरिक संहिता” के तहत महिलाओं को पूर्ण संरक्षण दिलाया जाता है।

महिलाओं की सुरक्षा तथा वास्तविक जीवन में काम आने वाले कानून –

  • घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005
  • यौन उत्पीड़न अधिनियम
  • PCPNDT एक्ट ।
  • समान वेतन अधिनियम, 1976
  • मातत्व लाभ अधिनियम, 1961
  • हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम
  • हिन्दू मैरिज ऐक्ट
महिलाओं के अधिकार –
  1. आपराधिक प्रक्रिया संहिता, सेक्सन 46 के तहत एक महिला को सूरज डूबने के बाद और सूरज उगाने से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता ।
  2. यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को अपने नाम की गोपनीयता बनाए रखने का पूरा अधिकार है ।
  • एक महिला को जीने का अधिकार देने के लिए लिंग की जांच और उसकी हत्या के खिलाफ कानून निर्मित है ।
  • यौन उत्पीड़न अधिनियम के तहत आपको वर्किंग प्लेस पर हुये यौन उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने का पूरा हक है, महिलाओं को जांच लंबित रहने तक 90 दिन की पेड लीव का प्रावधान ।
  • किसी मामले में अगर आरोपी एक महिला हैं तो उस पर की जाने वाली कोई भी चिकित्सा जांच प्रक्रिया किसी महिला द्वारा या किसी दूसरी महिला की मौजूदगी में ही की जानी चाहिए ।
  • रेप की शिकार हुई किसी भी महिला को मुफ़्त कानूनी मदद पाने का पूरा अधिकार है ।
  • भारत का कानून किसी महिला को अपने पिता की पुश्तैनी संपत्ति में पूरा अधिकार ।
  • पति की हैसियत के हिसाब से महिला को गुजारा भत्ता का हक ।
  • गरिमा और शालीनता के लिए अधिकार ।
महिलाएं कहाँ करें शिकायत –

                    किसी  प्रकार के प्रकरण हेतु प्राथमिक रूप से  कोई भी महिला दूरभाष नंबर 100 पर सूचना प्रदान कर सकती है इसके अलावा प्रत्येक महिला अपनी शिकायत नजदीकी पुलिस थाने पर भी दर्ज करवा सकती है तथा इसके अलावा महिला संरक्षण वाहिनी के किसी भी पदाधिकारी के पास अपनी शिकायत भी दर्ज करवा सकती है । 

क्यों नहीं कर पाती महिलाएं अपने हक की लड़ाई –
  1. खुद को बड़े कदम उठाने के लिए स्वतंत्र नहीं समझना ।
  2. साक्षरता की कमी ।
  3. जटिल न्यायिक प्रक्रिया ।
  4. लोक-लाज का डर
  5. भावनात्मक सोच ।
  6. पुरानी सोच ।

अनेकों कानूनों के निर्माण से ही नारी की सुरक्षा संभव नहीं है। एक सम्पूर्ण सुरक्षित वातावरण के निर्माण हेतु हमें अपने घर से ही शुरुआत करनी पड़ेगी, न्याय की प्रकिया को तीव्र करते हुये यह सुनिश्चित करना पड़ेगा की महिलाओं के हितों की सुरक्षा हेतु अविलंब कार्यवाही प्रत्येक स्तर पर अविलंब हो ।”