महिला एवं बाल विकास – भारतीय समृद्धि विकास कल्याण संगठन/ट्रस्ट

महिला एवं बाल विकास

बाल अधिकार – किसी भी किशोर/ किशोरी को जिसकी आयु 14 वर्ष से कम है उसे किसी भी कारखाने या जोखिम भरे कार्य करवाना कानूनी अपराध है इसके अतिरिक्त इन किशोर किशोरियों के पति किसी भी प्रकार की जाती धर्म वर्ण या समाजिक स्तर के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा सकता है

वे अधिकार जो 18 वर्ष तक की आयु के प्रत्येक किशोर/किशोरी को प्रदान किए गए हैं उन्हें हम बाल अधिकारों की श्रेणी में लाते हैं दूसरे शब्दों में बच्चों के मनुष्य होने के नाते जितने भी अधिकार है उन्हें हम बाल अधिकार कहते हैं

किसी भी किशोर/ किशोरी को जिसकी आयु 10 से 19 वर्ष के बीच है उन्हें प्राण एवं दैहीक स्वतंत्रता का संरक्षण मिला है इसका मतलब यह हुआ की किसी भी किशोर /किशोरी को उनके जीवन जिने व व्यक्तिगत रूप से स्वतंत्र रहने के अधिकार से वंचित (अलग) नहीं किया जा सकता है इसी अधिकार में अनुच्छेद 21 (क) जोड़ा गया है जिसके अनुसार संपूर्ण भारत में सभी बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने का मौलिक अधिकार (2009) प्राप्त है

शिक्षा मिशन के तहत भारतीय समृद्धि विकास कल्याण संगठन ट्रस्ट बिहार द्वारा मजदूर समाज विकास शिक्षा मिशन ग्रामीण/शहरी क्षेत्रों में 2- घंटे निशुल्क ट्यूशन व्यवस्था करने का कार्य कर रही है साथ ही संस्था द्वारा पढ़ने वाले छात्र/ छात्राओं को कॉपी किताब रबड़ पेंसिल कटर इत्यादि

बाल विवाह:- इस कानून के अनुसार यदि 21 वर्ष से कम आयु का कोई पुरुष 18 वर्ष से कम आयु की किसी लड़की से विवाह करता है तो यह 15 दिनों की साधारण कैद तथा ₹1000 का दंड भुगतना करना पड़ता है
यदि कोई किस वर्ष से अधिक आयु का पुरुष 18 वर्ष से कम आयु की लड़की से विवाह करता है तब वह 3 महीने की कैद या फिर दंड का भागीदार होता है l

महिला सुरक्षा संरक्षण : –   अगर कोई महिला पुलिस की नजरों में गुनाहगार या दोषी पाई जाती है तब ऐसी स्थिति में महिलाओं को कुछ निम्न अधिकार प्राप्त हैं जिनका महिलाएं उपयोग कर सकती हैं…..

पुलिस कर्मी से महिला गिरफ्तारी का कारण पूछ सकती है –
गिरफ्तारी के समय महिला को हथकड़ी नहीं लगाई जा सकती हथकड़ी सिर्फ मजिस्ट्रेट के ही आदेश पर लगाई जा सकती है महिला अपने वकील को भुलवा सकती है मुफ्त कानूनी सलाह की मांग कर सकती है साथ ही एक महिला को महिला पुलिस ही गिरफ्तार कर सकती है
गिरफ्तारी करने के 24 घंटे के अंदर आपको मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना अनिवार्य है तथा गिरफ्तारी के समय उसके किसी रिश्तेदार या मित्र को उसके साथ आने जाने दिया जाए अगर पुलिस उसे गिरफ्तार करके थाने ले आती है तब उस महिला को निम्न अधिकार प्राप्त हैं….
गिरफ्तारी के बाद महिला को महिला लॉकर में ही बंद किया जाए मानवीयता के साथ रखा जाए जोर- जबरदस्ती करना गैर कानूनी है
 पुलिस द्वारा मारे पीटे जाने या दुर्व्यवहार किए जाने पर मजिस्ट्रेट से डॉक्टरी जांच की मांग करें डॉक्टरी जांच केवल महिला डॉक्टर ही कर सकती है जांच  के लिए उसे थाने में या कहीं और बुलाए जाने पर इंकार कर सकती है आज केवल घर पर या परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में ही की जाए जिला के शरीर की तलाशी केवल दूसरी महिला द्वारा ही शालीन तरीके से ली जानी चाहिए अपनी तलाशी से पहले वह महिला पुलिसकर्मी की तलाशी ले सकती है यह दूसरी महिला को स्वतंत्र अधिकार दिया गया है।

घरेलू हिंसा महिला संरक्षण विधेयक:-
घरेलू हिंसा संरक्षण विधेयक कानून को 12 सितंबर 2005 को संसद में पारित कर दिया था।
इस कानून में जोर इस बात पर है की महिला को उसके घर में होने वाली हिंसा से मुक्ति मिले यह कानून महिला को घर में रहने का हक भी देता है।
एक परिवार में किसी व्यक्ति द्वारा पिटाई की जाती है या धमकी दी जाती है इसका मतलब महिला घरेलू हिंसा का शिकार हो रही है घरेलू हिंसा कानून 2005 के तहत घरेलू हिंसा के खिलाफ सुरक्षा प्राप्त करने का अधिकार है
से कोई भी हिंसात्मक व्यवहार किया गया है।
शारीरिक हिंसा यौन हिंसा मौखिक एवं भावनात्मक हिंसा आर्थिक हिंसा इत्यादि।
बाल सुरक्षा हेल्पलाइन -1098
महिला हेल्पलाइन -1090
पुलिस कंट्रोल रूम -100
एंबुलेंस -108
महिला हेल्पलाइन नंबर-181